इस पंचायत की सामाजिक व्यवस्था काफी हद तक ठीक-ठाक है, क्योकि हर समाज की तरह यहाँ भी जाति-पाति की लडाई काफी हद तक प्रभावित किया लेकिन समय के साथ काफी बदलाब आया। पहले लगभग ५ प्रतिशद लोग शिक्षित होते थे, लेकिन पिछले १० सालों के अन्दर शिक्षा में काफी बढ़ोतरी आया है। २०१० में ६० प्रतिशद लोगों में शिक्षा का प्रवेश हो चूका है, क्योंकि १९९० में, इस पंचायत के अन्दर सिर्फ २-३ विद्यालय हुआ करता था, लेकिन आज २०१० में ६ विद्यालय है। जिसमे ४ प्राथमिक विद्यालय और २ माध्यमिक विद्यालय है। १९९० में एक विद्यालय के अन्दर २०-३० विद्यार्थी पढने की छमता थी लेकिन आज इसकी संख्या ६०-७० है। यहाँ के लोगों के मानसिक विचारों में भी काफी बढ़ोतरी आया है। जैसे- तंत्र-मंत्र, जादू-टोना जैसे विचारों को काफी दूर छोर दिया है।
इस समाज के लोगों का जीवन-यापन का मुख्य श्रोत खेती है। यहाँ का मुख्य फसल धन और गेंहू है। लेकिन पिछले १५ सालों से बाढ़ आ जाने से धान की खेती न के बराबर होता है। बाढ़ के पानी यहाँ के खेतों में २-३ महीनो तक भरा रहता है। जिससे यहाँ बरोजगारी और गरीबी काफी आ गया। यहाँ से बहुत लोग शहरों की ओर जाना शरू कर दिया, और कमाने लगे, साथ में अपने गाँव और परिवार को शहरों से जोड़ दिया, जिससे समाज के लोगों में काफी हद तक बरोजगारी और गरीबी दूर करने में सुधार आया है। आज लगभग ३० प्रतिशद लोग शहरो में काम करते है। साथ ही अपने-अपने समाज और परिवार को देखभाल करते है। यातायात का मुख्य साधन रेल और बस जिसका दुरी ३ से ४ किलोमीटर पर है। इसका दुरी पैदल या जीप के द्वारा तय करते है।